Volatile Memory (RAM) क्या है? Which Is The Volatile Memory 2021 - WebBalaji

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नमस्कार दोस्तो सवागत है आपका हमारे इस आर्टिकल में। यदि आप भी Volatile Memory (RAM) के बारे जानकारी ढूंढ रहे है जैसे Which Is The Volatile Memory? Volatile memory of computer? नॉन वोलेटाइल मेमोरी मीनिंग इन हिंदी? वोलेटाइल मेमोरी क्या है? RAM is a volatile memory? नॉन वोलेटाइल मेमोरी कौन सी है? प्राथमिक मेमोरी और द्वितीयक मेमोरी में अंतर? तो हमारी इस पोस्ट को पूरा पढे।

वोलेटाइल मैमोरी क्या है? (Volatile Memory (RAM))

Volatile Memory उस मैमोरी को कहा जाता है जो अस्थाई होती है। इस प्रकार की मेमोरी में तब तक लिखा या पढ़ा का सकता है जब तक System बंद न हो अर्थात एक बार सिस्टम किसी कारण वश बंद हो जाने पर मैमोरी का डाटा loss हो जाता है।

Volatile Memory (Ram) क्या है? Which Is The Volatile Memory

Volatile Memory का सबसे अच्छा उदाहरण RAM है।

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RAM (Random Access Memory)

RAM (Random Access Memory) को Read/Write मैमोरी भी कहते है, क्योंकि इस मैमोरी में हम डाटा को संग्रहित करने के साथ साथ उस संग्रहित Data को पढ़ भी सकते है।

RAM कंप्यूटर की अस्थाई मैमोरी होती है। Input Device द्वारा Input किया गया डाटा क्रिया ( Processing) से पहले RAM में ही संग्रहित होता है और C.P.U. द्वारा आवश्यकता पड़ने पर वहा से प्राप्त कर लिया जाता है।

 रैम में Data या Program अस्थाई रूप से संग्रहित होता है। कंप्यूटर बंद हो जाने पर या विद्युत प्रवाह रुक जाने पर RAM में संग्रहित Data मिल जाता है, इसलिए RAM को Volatile या अस्थाई मैमोरी भी कहते है।

RAM (Random Access Memory) की क्षमता या आकार भिन्न भिन्न होते है।

जैसे – 1MB, 2MB, 4MB, 8MB, 16MB, 64MB, 128MB, 256MB, 512MB, 1024MB आदि

चुकी RAM (Random Access Memory) की किसी भी Location का डाटा व निर्देशो का संग्रहण एवं वापस प्राप्त करना, यह सब रेंडमली (Randomly) होता है। अत: सभी लोकेशन का Access Time समान होता है।

RAM के प्रकार

पर्सनल कंप्यूटर सामान्यत दो प्रकार की RAM प्रयोग की जाती है –

1. डायनैमिक रैम (DRAM)

डायनैमिक रैम को संक्षिप्त में DRAM के नाम से जाना जाता है। DRAM को जल्दी जल्दी रिफ्रेश (Refresh) करने की आवश्यकता पड़ती है।

रिफ्रेश का अर्थ यहां पर चिप को विद्युत आवेशित करना है। यह एक सेकेंड में लगभग हजारों बार रिफ्रेश होती है। बार बार रिफ्रेश करने के कारण यह दूसरे रैम की अपेक्षा धीमी होती है

2. स्टेटिक रैम (SRAM)

स्टेटिक रैम (SRAM) कम रिफ्रेश होती है, जिसका कारण डाटा ज्यादा समय तक रहता है। स्टेटिक रैम (SRAM) को संक्षेप में SRAM के नाम से जाना जाता है। SRAM अन्य सभी रैमस की अपेक्षा अधिक तेज एवं महंगी होती है।

RAM की विशेषताए
  • RAM User Program को Execute करने हेतु आवश्यक System को भी संग्रहित करती है।
  • मैन मैमोरी हमेशा CPU द्वारा ही एड्रेस की जाती है।
  • इसमें सूचना को पढ़ा एवं लिखा भी जा सकता है।

हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)

Hard Disk Drive कंप्यूटर में निश्चित स्थान पर Fix रहती है, अतः इसे Fixed Disk भी कहा जाता है। हार्ड डिस्क धातु के अनेक डिस्क प्लेतरो (Disk Platters) का समूह होता है, प्रत्येक डिस्क की सतह पर चुम्बकीय पदार्थ की परत या लेप (Coating) होती है, सभी डिस्क प्लेटर एक Spindle में होती है।

शीर्ष डिस्क की उपरिय सतह और निम्न डिस्क की निचली सतह के अतिरिक्त प्रत्येक डिस्क की दोनो साथ पर डाटा संग्रहित किया जा सकता है। प्रत्येक सतह के लिए एक रीड/ राइट हेड (Read/write Head ) होता है। इसमें Storage Capacity ज्यादा होती है।

Read/Write Heads का एक समूह एक ही भुजा या आर्म पर लगा होता है। प्रत्येक हेड आगे पीछे गति करके घूमती हुई डिस्क की सतह पर उपयुक्त ट्रैक (Track) पर पहुंच सकती है।

डिस्क उच्च गति (लगभग 3600 (Revolution) मिनट 7,200 Revolution per minut से घूमती है। उपर्युक्त ट्रैक तक गति करने के लिए एक बार एक ही Read / Write हेड, सी. पी.यू. (CPU) द्वारा गतिमान होता है।

रीड / राइट हैड ट्रैक्स (ट्रैक्स) लिए बिना सीधे उसी ट्रैक पर स्थित हो जाता है जिसमे डाटा उपस्थित है। हार्ड डिस्क Direct Access Storage Device का उदाहरण है।

ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)

सन् 1990 में ऑप्टिकल डिस्क की तकनीकी विकसित हुई थी। इस डिस्क में लेकर किरण की सहायता से डाटा को रीड (Read) और राईट (Write) किया जाता है। इसलिए इसे प्रकाशित डिस्क या Optical Disk कहा जाता है।

यह डिस्क रेजिन (Resin) पदार्थ जैसे – पाली कार्बोनेट से बनी होती है। इसकी सतह पर Aluminium पदार्थ का लेप रहता है जिससे यह परावर्तन (Reflection) का गुण रखती है।

इस परावर्तक सतह पर एक उच्च तीव्रता लेजर किरण डाली जाती है जिससे एक छोटा पिट्ट या गड्डा (Tiny Pit) बनता है जो 1 – Bit का सूचक है। सतह पर जहां पिट नहीं है वह 0 – Bit का सूचक होता है, इसे Land कहते है।

Data को डिस्क से पढ़ने या रीड करने के लिए काम तीव्रता की लेजर किरण इसकी सतह पर डाली जाती है । परावर्तित किरण को फोटो डायोट (Photo Diyot) द्वारा जांचा जाता है।

परिवर्तित किरण की तीव्रता में अंतर परिलक्षित होने पर पिट की उपस्थिति का पता चलता है, क्योंकि पिट किरण को अनेक दिशाओं में फैला देता है और फोटो डियोट तक किरण काम तीव्रता पहुंचती है।


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