समास किसे कहते है उदाहरण|समास के कितने भेद हैं | समास की प्रमुख विशेषताएं - WebBalaji

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✓समास किसे कहते है उदाहरण|✓समास के कितने भेद हैं | ✓समास की प्रमुख विशेषताएं

क्या आप जानते हैं समास किसे कहते है? यदि नहीं और आप भी समास से जुड़ी जानकारी ढूंढ रहे है जैसे कि समास किसे कहते हैं उदाहरण, दिगु समास किसे कहते हैं, कर्मधारय समास किसे कहते हैं उदाहरण सहित, नञ समास किसे कहते है, अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं, बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं, तत्पुरुष समास किसे कहते हैं उदाहरण, समास के कितने भेद हैं, समास विग्रह किसे कहते हैं, समास परिभाषा व भेद आदि, तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक पूरा पढ़े।

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समास किसे कहते है? समास परिभाषा

समास परिभाषा – “दो या दो से अधिक शब्दो के मेल से बने शब्द को समास कहते है।”

प. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार दो या दो से अधिक शब्दो का परस्पर सम्बन्ध बताने वाले शब्दो या प्रत्ययो का लोप होने पर उन दो या अधिक शब्दो से जो एक स्वतंत्र शब्द बनता है।

उस शब्द को सामासिक शब्द कहते है और उन दो या अधिक शब्दो का को संयोग होता है वह समास कहलाता है।

दूसरे शब्दों में (परिभाषा) “अनेक पद मिलकर जब एक पद बन जाते है तो वह समास कहलाता है।

उदाहरण

  • राजा का पुत्र = राजपुत्र
  • दश +आनन = दशानन
  • पिट +अम्बर = पीताम्बर

समास की विशेषताएं

समास की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार है –

  • संक्षेप में कम से कम शब्दो में अधिक से अधिक अर्थ प्रकट करना समास का मुख्य प्रयोजन है।
  • समास में कम से कम पदो का योग होता है।
  • समास में समस्त होने वाले पदो की विभिकती प्रत्यय लुप्त हो जाता है।
  • समास पदो के बीच संधि की स्थिति होने पर संधि अवश्य होती है।

समास से को नया शब्द बनता है, उसे समासिक पद या समासीक शब्द कहते है। इस प्रकार मिलने वाले शब्द को दो शब्दो के बीच चिन्ह को समास (-) कहा जाता है।

समास विग्रह किसे कहते हैं

समस्त पद या समासीक पद को अलग अलग करके, उनको उनकी संबंधित विभक्तियो कारक, लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि के साथ रखकर उन खंडो के पारस्परिक संबंध व्यक्त करने की नीति को समास विग्रह कहा जाता है।

समास विग्रह द्वारा समस्त पद को खंडित करके तत्संबंधी मूल पदो को पुनः लाया जाता है।

उदाहरण

  • माता – पिता = माता और पिता
  • दाल – भात = दाल और भात
  • पाप – पुण्य = पाप और पुण्य
  • भाई – बहन = भाई और बहन
  • आम – बिता = आम और बीती

समास रचना के नियम

समास की रचना करते समय निम्नलिखित नियमो को ध्यान में रखना चाहिए

  • शब्द जोड़ने में संधि नियमो का पालन किया जाता है। जैसे कि विद्या + आलय = विद्यालय
  • शब्दो के बीच के विभक्त चिन्ह तथा संबंध सूचक प्रत्य्यो का लोच हो जाता है। जैसे दाल और रोटी = दाल – रोटी।
  • सामान्य रूप से समस्त पद मिलाकर लिखे जाते है। परन्तु बहुत लंबे और बड़े शब्द होने पर पड़ी के बीच में योजक चिन्ह ( – ) का प्रयोग करते है। जैसे वैश्य-कुल- कुमार, कवि-कुल-शिरोमणि आदि.

समास के भेद या समास के प्रकार

मुख्य रू से समास निम्न प्रकार के होते हैं –

  • तत्पुरुष समास
  • अव्यविभव समास
  • द्वंद्व समास
  • कर्मधरण समास
  • द्विगु समास
  • बहुब्रिही समास

तत्पुरुष समास किसे कहते हैं उदाहरण

तत्पुरुष समास परिभाषा – जिस समास का अंतिम पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते है।

इसे कारक की वीभक्तियो। के आधार पर विभाजित किया जाता है तथा उसी के नाम पर पुकारा जाता है।

उदाहरण कर्म कारक के आधार कर्म तत्पुरुष इत्यादि।

तत्पुरुष समास के प्रकार

  • कर्म तत्पुरुष
  • कारण तत्पुरुष
  • समप्रदान तत्पुरुष
  • अपादान तत्पुरुष
  • संबंध तत्पुरुष
  • अधिकरण तत्पुरुष
• कर्म तत्पुरुष समास

कर्म तत्पुरुष – जिसमे कर्म कारक की विभक्ति का लोप हो जाता है।

जैसे – ‘सवर्ग को गया हुआ’ विभक्ति का लोप हो जाने पर स्वर्ग गत । माखन को चुराने वाली माखन चोर।

स्वर्ग को प्राप्त = स्वर्ग प्राप्त।

देश को गया हुआ = देशगत।

जेब को काटने वाला = जेबकट।

सब कुछ को जानने वाला = सवर्ज्ञा।

• कारण तत्पुरुष समास

कारण तत्पुरुष – वह तत्पुरुष जिसमे कारण कारक की विभक्ति का लोप हो।

उदाहरण

नीति से युक्त = नीतियुक्त।

शोक से आकुल = शोकाकुल

मद से अंधा = मदांध

ईश्वर के द्वारा दिया हुआ = ईश्वर दत्त

श्रम से साध्य = श्रमसाध्य

• समप्रदान तत्पुरुष समास

समप्रदान तत्पुरुष वह होता है जिसमे संप्रदाय कराक या चतुर्थी के चिन्ह का लोप हो।

उदाहरण

  • हाथ के लिए कड़ी = हथकड़ी
  • राह के लिए खर्च = राहखार्च
  • देश के लिए भक्ति = देशभक्ति
  • यज्ञ के लिए वेदी = यज्ञवेदी
  • सभा के लिए मण्डप = सभामंडप

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• अपादान तत्पुरुष समाज

अपादान तत्पुरुष में अपादान कराक का चिन्ह = पंचमी विभक्ति का लोभ हो।

उदाहरण

  • ऋण से मुक्त = ऋणमुक्त
  • ऋण से विमुख = रणविमुख
  • धर्म से भ्रष्ट = धर्म भ्रष
  • सेवा से मुक्त = सेवामुक्त
  • देश से निकला = देशनिकाला
• संबंध तत्पुरुष समास

संबंध तत्पुरुष समास में पदो से संबंध कारक के लुप्त होने पर संबंध तत्पुरुष समास बनाता है।

उदाहरण

  • राष्ट्र का पति = राष्ट्रपति
  • सेना का पति = सेनापति
  • स्वर की साधना = स्वर साधना
  • मानव का समाज = मानव समाज
  • भू का पति = भूपति
• अधिकरण तत्पुरुष समास

अधिकरण तत्पुरुष समास जहा समा सिक पदो में अधिकरण कारक का लोप हो, वहा अधिकरण तत्पुरुष समास होता है।

उदाहरण

  • ग्राम में बसने वाला = ग्रामवासी
  • ग्रह में स्थित = गृहस्थी
  • ग्रह में प्रवेश = गृहप्रवेश
  • आप में बीती हुई = आपबीती
  • कान में फुसफुसाहट = कानाफूसी

अव्यविभव समास

अव्यविभव समास उस समास को कहा जाता है जिस समास का प्राय पूर्व पद या पहला पद प्रधान हो तथा पूर्ण पद क्रिया विश्लेषण या अवय्यव हो उसे अव्यविभव समास कहा जाता है।

उदाहरण

  • यथाशक्ति
  • प्रतिदिन
  • आजीवन
  • अनजाने
  • तत्काल
  • दिनभर
  • आमरण
  • भरपेट आदि

संज्ञाओं के समान अवयवों की दीव रुकती से भी अव्यविभव समास बनता है।

जैसे कि

  • धीरे धीरे
  • पल पल
  • हाथो हाथ
  • कभी कभी

इन दीव रक्ती शब्दो के बीच ही या आ जोड़कर भी अव्यविभव समास बनता जाता है।

जैसे कि

  • मन ही मन
  • एकाएक
  • धड़ाधक आदि

द्वंद्व समास

द्वंद्व समास – जिस समाज के सभी पद प्रधान हो अथवा उनका समाहर प्रधान हो वहा द्वंद्व समास होता है। यह समास हिंदी का प्रिय समास है।

द्वंद्व समास के प्रकार – द्वंद्व समास के निम्न तीन भेद है –

  • इतरेतर द्वंद्व समास
  • समाहार द्वंद्व समास
  • वैकल्पिक द्वंद्व समास

• इतरेतर द्वंद्व समास – जहां पर सब पद समुच्चय बोधक हो ‘और’, ‘या’ अथवा ‘आदि’ शब्दो से जुड़े हो वहां इतरेतर द्वंद्व समास होता है।

उदाहरण

  • राधा और कृष्ण = राधाकृष्ण
  • सीता और राम = सीताराम
  • दूध और रोटी = दूध रोटी
  • कंद, मूल और फल = कंद-मूल-फल

कभी कभी दो पद मिलकर एक ही वस्तु की सूचना देते है।

जैसे – घी और गुण = घी-गुण।

द्वंद्व समास में जब भिन्न लिंगी शब्दो का समास होता है, तब लिंग व्यवस्था प्रयोग से ही जानी का सकती है। वैसे अधिकतर सामाजिक शब्द पुल्लिंग ही रहता है।

जैसे – गाय ओर बैल = गाय बैल।

• समाहार द्वंद्व समास

समाहार द्वंद्व समास – जिस द्वंद्व समास से कुछ समानार्थक शब्दो का समास कर उनसे संबंध अन्य शब्दो के अर्थ का भी समाहार कर लिया जाता है, उसे समाहार द्वंद्व समास कहते है।

यानी – ‘सेठ और साहूकार ‘ के अतिरिक्त अन्य सभी धनी लोगो का समाहार भी इस पद में है। इसी प्रकार दाल रोटी सभी प्रकार के सामाजिक भोजन। का प्रतीक है।

समाहार द्वंद्व समास के प्रकार

यह समास तीन रूपो में उपलब्ध होता है –

  • समानार्थक शब्दो का समास – कपड़े और लत्ते = कपड़े लत्ते, लूट और मार = लूटमार आदि।
  • मिलते जुलते अर्थ वाले शब्दो का समास – घर और द्वार = घर द्वार, रहन और सहन = रहन सहन।
  • एक पद और निरर्थक का समास – अड़ोसी और पड़ोसी = अड़ोसी पड़ोसी, आमने और सामने = आमने सामने।

• वैकल्पिक द्वंद्व समास

वैकल्पिक द्वंद्व समास – जिस द्वंद्व समास में दो पदो के बीच या अथवा आदि विकल्प सूचक अव्यय छिपे है। वहा वैकल्पिक द्वंद्व समास होता है।

उदाहरण

पाप पुण्य , यहां पाप का अर्थ पाप और पुण्य की प्रसंगानुसार हो सकता है।

कर्मधारण समास

जिस समास में विश्लेषण विषेश्य तथा उपमेय उप मान का मेल हो उसे, कर्मधारण समास कहते है।

या जिस समास में प्रथम पद विशेषण हो, उसे कर्मधारण समास कहते है।

जैसे

  • महा + राजा = महाराजा
  • नीला + कमल = नीलकमल
  • चन्द्र + मुख = चंद्रमुख
  • अंध + विश्वास = अंधविश्वास।

द्विगु समास

जिस समाज में पहला पद संख्या वाचक विशेषण हो, उसे द्विगु समास कहते है।

जैसे – त्रिभुवन, चौमासा, पंचवटी, नवरत्न

समास विग्रह

  • त्रि + भुवन = त्रिभुवन
  • चौ + मास = चौमासा
  • पंच + वटी = पंचवटी
  • सप्त + शती = सप्तशती
  • नव + रत्न = नवरत्न

बहुब्रिही समास

जिस समास के दोनों पदो में से कोई भी पद प्रधान न हो, बल्कि समस्त पद किसी संज्ञा की विशेषता बताए उस बहुब्रिही समास कहा जाता है।

यानी बहुब्रिही समास में दोनों पदो के मेल से एक नवीन अर्थ ध्वनि होती है उसे प्रकट करना ही बहुब्रिही समास में मुख्य होता है।

उदाहरण

  • दशानन – दस है आनन जिसके अर्थात रावण।
  • लम्बोदर – लंबा है उदर जिसका अर्थात गणेश जी।
  • हनुमान – हनू का मान है प्राप्त जिसको अर्थात महावीर।
  • नीलकंठ – नीला है कंठ जिसका अर्थात महादेव।

इसी प्रकार अन्य और उदाहरण दिए जा सकते है जैसे कि पीताम्बर, चतुरानन, वीना पाणी, सहस्त्रबाहु, गंगाधर, गांडीवधारी, गजाधर।

बहुब्रिही समास के प्रकार

बहुब्रिही समास के दो प्रकार होते है –

• समानाधिकरण बहुब्रिही समास – जहां दोनों पद एक ही कारक (विभक्ति)के है, वहीं यही समास होता है।

जैसे – दशानन = दस आनन हो जिसके वह।

• व्याधिकरण बहुब्रिही समास – जिस बहुब्रिही समास के विग्रह में दिनों पड़ी की विभक्तियां भिन्न भिन्न हो, उसे व्यधिकरण समास कहा जाता है।

जैसे

  • शुल है हाथ में जिसके = शूल वाणी।
  • वीणा है पाणी में जिसके = वीना पाणी।

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